नई अफीम नीति के खिलाफ किसानों का विरोध

नई अफीम नीति के खिलाफ किसानों का विरोध

गौरव तिवारी
मंदसौर, मंदसौर में अफीम नीति के खिलाफ बही चौपाटी पर किसान धरना-प्रदर्शन करेंगे। किसानों का कहना है कि घोषित की गई नई अफीम नीति किसानों के हित में नहीं हैं। किसान संगठन ने मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता पर नए लाइसेंस देने का वादा खिलाफ के आरोप लगाए हैं। नई अफीम नीति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होने से किसानों में इस नीति को लेकर भारी आक्रोश है। किसानों को सांसद ने अच्छी अफीम नीति का भरोसा दिया था, लेकिन किसानों को निराशा ही हाथ लगी। न तो नीति किसानों के हित में आई, न ही अफीम के भाव में वृद्धि की गई। अफीम कास्तकार संगठन के अमृतराम पाटीदार ने बताया कि नीमच नारकोटिक्स विभाग के समक्ष प्रभावी धरना-प्रदर्शन करने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो,मल्हारगढ़ तहसील के बही चौपाटी पर धरना-प्रदर्शन किया आएगा। इस दौरान कलेक्टर को केन्द्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन देकर के नीति में परिवर्तन की उच्चस्तर पर मांग की।

किसानों की मांग

किसानों की मांग है कि इस साल 3.00 मार्फिन पर लाइसेंस दिए जाएं। 1990 से अब तक कम औसत में कटे पट्टे बहाल किए जाएं। घटिया पट्टे को तुरंत जारी किया जाए और तौल केंद्र की रिपोर्ट को ही अंतिम रिपोर्ट मानी जाए। 2013-14 में बेमौसम बरसात और शीतलहर से कटे हुए पट्टे दिए जाए। प्रत्येक किसान को 10-10 आरी के नए पट्टे दिए जाएं। अफीम का भाव 10 हजार रुपए प्रति किलो किया जाए। अफीम की फसल को भी फसल बीमा के दायरे में रखा जाए तथा सीएसपी पद्धति को पूरी तरह समाप्त किया जाए। 

तीन खंडो में बांटा जा रहा लाइसेंस

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की जारी हुई अफीम नीति के बाद जिले में पात्र किसानों को पट्टा (लायसेंस) देने कार्य शुरू हो गया है। जिले के अफीम काश्तकारों को तीन खंडों में बांटा गया है। इन तीनों खंडों में मार्फिन की मात्रा पूरी करने वाले किसानों को पट्टा दिया जा रहा है। पट्टा मिलने के बाद किसान अफीम की बोवनी कर पाएंगे। 4.2 से 5 तक मार्फिन देने वाले किसानों को 6 ऑरी का पट्टा दिया जाएगा। तो 5 से 5.9 मार्फिन देने वालों को 10 ऑरी और 5.9 से अधिक मार्फिन देने वालों को 12 ऑरी का पट्टा दिया जाएगा। 

नीति बन गई, नियम किसी को पता नहीं

जिले में बेठे अधिकारियों से जब बात की तो पता चला कि जारी की गई अफीम नीति में नियम तो बन गया, लेकिन यह किस तरह से होंगे। इसके क्या मापदंड हैं, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। अधिकारियों के अनुसार उन्हें नहीं पता कि खेत मे खड़ी अफीम की फसल से डोडे सरकारी अनुबंध के तहत कोई निजी कंपनी लेगी या नार्कोटिक्स विभाग। सीपीएस के अनुसार क्या मापदड्डड होंगे, डोडों को कौन खरीदेगा। डोडों को किस स्थिति में काटा जाएगा। किसानों को कितना लाभ मिलेगा जैसे कई सवालों के जवाब किसी के पास नहीं है। इन्हीं सवालों के वजह से किसानों के बीच भी असामंजस्य की स्थिति बनी हुई है। बहरहाल सरकार ने कम औसत पर मार्फिन देने वाले किसानों को सीपीएस पद्धति से 6 आरी के पट्टे देगी। इसके लिए 8 से 12 नवम्बर की तारीख तय की गई है।

सीपीएस पद्धति के तहत मिलेगा लायसेंस

जिन किसानों की औसत अफीम में 3.7 से 4.2 तक मार्फिन पाई गई है उन्हें भी सरकार ने 6 आरी के पट्टे की पात्रता में रखा है । इन्हें भी अफीम पट्टे दिए जाएंगे बशर्ते अफीम का उत्पादन ( सीपीएस) पद्घति के अनुसार करना होगा।

क्या है सीपीएस पद्धति

सीपीएस कन्सन्ट्रेड पॉपी स्ट्रा के अनुसार सरकार किसानों को अफीम फसल उत्पादन के लिए लाइसेंस देती है। किसान अफीम के डोडा चूरा नहीं लगा सकता। डोडे से अफीम लेने का अधिकार किसान को नहीं मिलेगा। सरकार या सरकार की एजेंसी किसान के खेत से अफीम के डोडों को काट लेती है। इसके बदले किसानों को भुगतान किया जाता है। अब तक यह पद्दति विदेशों में होती है। इससे तस्करी पर लगाम लगेगी। 3.7 से अधिक और 4.2 से कम मार्फिन देने वाले किसानों को सीपीएस के तहत 6 आरी के पट्टे मिलेंगे।

तीन खंडों की स्थिति

अफीम खंड- 1 में 157 गांव हैं। इनमें करीब 4 हजार 842 किसानों को अफीम लायसेंस वितरित किए जाएंगे। पिछले साल इनकी संख्या 5950 थी। इस खंड में 20 अक्टूबर से 1 नवंबर तक पट्टे दिए जाएंगे।
अफीम खंड- 2 में 136 गांव हैं। इनमें करीब 5 हजार 30 किसानों को पट्टे वितरित किए जाएंगे। पिछले साल अफीम उत्पादक किसानों की संख्या 6 हजार 216 थी। इस खंड में 2 नवम्बर तक पट्टे वितरित किए जाएंगे।
अफीम खंड- 3 में 237 गांव हैं। इनमे 3 हजार 938 किसानों को लाइसेंस की पात्रता है। पिछले वर्ष इनकी संख्या 5 हजार 4 थी। तृतीय खंड में 31 अक्टूबर तक पट्टे वितरित किए जाएंगे।