पशुधन को स्वस्थ्य एवं सुरक्षित रखने के लिए समसामयिकी सलाह

rafi ahmad ansari
बालाघाट। कृषि कार्यों एवं दुग्ध उत्पादन में उन्नत नस्ल के स्वस्थ्य पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्षा ऋतु में पशुओं की देखभाल के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव द्वारा किसानों एवं पशुपालकों को समसामयिकी सलाह दी गई है। किसानों एवं पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वर्षा ऋतु में होने वाले बीमारियो की रोकथाम के लिए उपाय करे । गलघोंटू एवं लंगड़ी बुखार का टीका लगाए । इसके साथ ही कृमि नाशक दवा पिलाये, पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन के लिए चारे के साथ साथ 50 ग्राम नमक और 100 ग्राम खनिज मिश्रण प्रति पशु अवश्य दे तथा नियमित रूप से शुद्ध और ठंडा पानी दिन में तीन बार पिलाये।
कीड़ों से पशुओं के बचाव के लिए मवेशी शेड में धुआं करें
मच्छरों और अन्य कीड़ों से पशुओं के बचाव के लिए मवेशी शेड में धुआं करें। आर्द्र स्थितियों में दुधारू पशुओं में प्रतिरक्षा शक्ति कम हो जाती है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पशुओं के फीड में फीड सप्लीमेंट मिलायें एवं प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाये। बकरी को बारिश से गीला होने से बचाएं अन्यथा वे निमोनिया और डायरिया रोग द्वारा संक्रमित हो सकते है। बकरी को छाया में रखा जाना चाहिए और एक दिन में तीन बार साफ और ताजा पानी प्रदान करना चाहिए। पीपीआर रोग को नियंत्रित करने के लिए बकरियों का टीकाकरण करें। बकरियों को संक्रामक निमोनिया का टीका लगवाएं। बकरियों मे एळश् वैक्सीन टीकाकरण करें। किलनी और पिस्सुओं के नियत्रण करने के उपाय करें। मुगीर्शाला की बिछाली गिला होने पर समय से पलट दें और इसे सुखाने के लिए चूना का भुरकाव करें। पशुओ को इस समय बाह्य परजीवियों का प्रकोप हो सकता है अत: इसके बचाव हेतु क्लीनर या ब्यूटाक्स नामक दवा का 1.0 लीटर पानी में 2. 0 मिली दवा के अनुपात में मिलाकर पशुओ के शरीर पर सुरक्षात्मक तरीके से लगावे तथा इसके उपरांत पशु को एक घंटे बाद नहलावे।