किसानों के लिए मुनाफे वाला सौदा उड़द की खेती, जानिए कैसे मिलेगा अच्छा उत्पादन

भोपाल। गर्मी का मौसम आ गया है। खेत में नई फसलों की बुवाई का समय है। ऐसे में आज हम एक ऐसी दलहनी फसल की खेती के बारे में बताएंगे, जिसकी डिमांड बाजार में पूरे साल रहती है। इस वजह से इसकी खेती करना किसानों के लिए मुनाफे वाला सौदा साबित होगा। हम बात कर रहे हैं उड़द की खेती की।
अप्रैल के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई
उड़द को दलहनी फसलों में प्रमुख फसल माना जाता है। इसकी खेती के लिए गर्मी का मौसम सही समय होता है क्योंकि इस दौरान तापमान में थोड़ी नमी रहती है। गर्मी का मौसम उड़द की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। अप्रैल के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई स्टार्ट कर देनी चाहिए क्योंकि इसके विकास के समय 30 से 40 डिग्री का तापमान सही होता है।
हल्की रेतीली, दोमट या मध्यम प्रकार की मिट्टी अनुकूल
उड़द की बुवाई के लिए हल्की रेतीली, दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, उसे अधिक उपयुक्त माना जाता है। पीएच मान 7-8 के बीच वाली भूमि उड़द के लिए उपजाऊ होती है। उड़द की खेती में अम्लीय व क्षारीय भूमि बिल्कुल भी अच्छी नहीं होती है। बारिश के शुरू होने के बाद दो- तीन बार हल या बखर चलाकर खेत को समतल करें। वर्षा आरम्भ होने के पहले बोनी करने से पौधों की पैदावार अच्छी होती है।
उड़द की उन्नत किस्मे
वैसे तो बाजार में कई प्रकार की उन्नत किस्म हमें मिलती है जिन्हे अलग-अलग जलवायु के हिसाब से अधिक उत्पादन के लिए पूरे भारत में उगाया जाता है, आइये जानते है उड़द की प्रमुख किस्में:
टी. 19, पंत यु 19, कृष्णा, पंत यु 19, जे. वाई. पी, आर.बी.यू. 38, यु.जी. 218, एल बी जी- 20, के यू- 309, ए डी टी- 4, ए डी टी- 5, जवाहर उड़द 2, आजाद उड़द- 1, वांबन- 1,
कैसे करें उड़द की बुवाई
किसी भी फसल की अच्छी उपज के लिए सही तरीके से बुवाई होना अति आवश्यक है। ऐसे में उड़द की बुवाई के लिए लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए। वहीं पौधों से पौधों की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बीज को भी कम से कम 4 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। खेत में बुवाई के समय अगर नमी न हो तो एक सिंचाई कर दें। वहीं नींदानाशक बासालिन 800 मिली। से 1000 मिली। प्रति एकड़ 250 लीटर पानी में घोल बनाकर जमीन बखरने के पहले खेत में छिड़कने से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
कैसे करें कीटों और रोग सेबचाव
उड़द की फसलों में कीट और रोग का खतरा बना रहता है। ऐसे में समय रहते इसका प्रबंधन कर लेने से किसान अपने फसलों को नुकसान होने से बचा सकते हैं। फसलों में रोगों की पहचान करें, फिर इसके अनुसार इसमें उपरोक्त कीट नाशकों का छिड़काव करें। अलग-अलग रोगों के लिए अलग-अलग दवा का छिड़काव किया जाता है। ऐसे में इसके लिए फसलों के चिकित्सक से संपर्क करें।