दूध पर लागू नहीं होगी एमएसपी, 26 नवंबर को देश भर में प्रदर्शन करेंगे दूध उत्पादक किसान 

दूध पर लागू नहीं होगी एमएसपी, 26 नवंबर को देश भर में प्रदर्शन करेंगे दूध उत्पादक किसान 

सरकार के इस निर्णय का विरोध करेंगे दुग्ध उत्पादक किसान

नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में नहीं लाया जाएगा। पशुपालन और डेयरी विभाग देश में दूध की खरीद और बिक्री की कीमतों को रेगुलेट नहीं करता। इसकी कीमत सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा उनकी उत्पादन लागत और बाजार की शक्तियों के आधार पर तय की जाती है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि दूध की कीमत सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने के कारण विभाग के पास देश में दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

लंबे समय से दूध को एमएसपी के दायरे में लाने की मांग 
सरकार के इस निर्णय के बाद दूध उत्पादक किसानों ने विरोध करने का फैसला किया है। पशुपालक लंबे समय से दूध को एमएसपी के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि कई बार किसानों को पानी से भी सस्ते दाम पर दूध बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। दूध की अच्छी कीमत को लेकर पशुपालक देश में कई बार आंदोलन कर चुके हैं।
केंद्र सरकार ने मंशा पर पानी फेर दिया 
महाराष्ट्र में तो हर साल दो-तीन बार वो दूध सड़कों पर बहाकर कम दाम मिलने का विरोध जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि पशुओं को पालने का खर्च काफी बढ़ गया है, लेकिन उस हिसाब से उन्हें दाम नहीं मिल रहा है। सारा मुनाफा डेयरी कंपनियां कमा रही हैं। इसलिए इसका दाम फिक्स कर दिया जाए। लेकिन अब केंद्र सरकार ने उनकी इस मंशा पर पानी फेर दिया है। जबकि, डेयरी सेक्टर अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत का योगदान देता है।
बिना एमएसपी के फायदे में नहीं आ सकते दुग्ध उत्पादक किसान
दूध उत्पादक किसान संगठन के सह संयोजक डॉ. अजीत नवले का कहना है कि जब तक दूध को एमएसपी के दायरे में लाकर उसका न्यूनतम दाम नहीं फिक्स किया जाएगा तब तक पशुपालक फायदे में नहीं आएंगे। उनकी पूरी मेहनत का फल सहकारी और निजी डेयरियों को मिलता रहेगा। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ दूध उत्पादक किसान श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन के जन्मदिन पर 26 नवंबर को देश भर में प्रदर्शन करेंगे। ताकि सरकार पर दबाव पड़े।

गुणवत्ता के हिसाब से घटता-बढ़ता है दाम 
दरअसल, दूध का दाम तय करने का एक फार्मूला है। इसका दाम गुणवत्ता के हिसाब से घटता-बढ़ता है। डेयरी कंपनियां फैट और एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) के आधार पर कीमत तय करती हैं। इसका बेस दूध में 6 फीसदी फैट और 9 फीसदी एसएनएफ होता है। इस स्टैंडर्ड से नीचे-ऊपर होने पर दाम कम और ज्यादा हो जाता है। बाकायदा किसानों को मिलने वाले बिल पर लिखा जाता है कि कितना एसएनएफ और कितना फैट है।

भारत दूध उत्पादन में नंबर वन, उत्पादक परेशान 
भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया भर में पहले स्थान पर है। लेकिन दुर्भाग्य से उसके उत्पादक परेशान हैं। क्योंकि जिस हिसाब से चारा, पशु आहार और पशुओं के रखरखाव पर खर्च बढ़ रहा है उस हिसाब से उन्हें दाम नहीं मिल पा रहा। फिलहाल, उत्पादन की बात करें तो साल 2020-21 में यहां 209.96 मिलियन टन दूध का प्रोडक्शन हुआ था। जो विश्व का करीब 22 फीसदी के आसपास है।

एक सर्वे में सामने आए थे चौंकाने वाले तथ्य 
दूध उत्पादकों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को लेकर 2016-17 में एक सर्वे हुआ था। इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे।
पता चला था कि राजस्थान में सहकारी डेयरी पर दूध सप्लाई करने वाले किसानों को स्थानीय गाय से रोजाना महज 19.6 रुपये, क्रॉस बीड से 25.4 रुपये एवं भैंस से मात्र 24.5 रुपये की शुद्ध इनकम होती है।
ओडिशा में सहकारी डेयरी पर दूध सप्लाई करने वालों को स्थानीय गाय से प्रति दिन 13.6 रुपये, क्रॉस बीड से 31 रुपये और भैंस से 25.2 रुपये की शुद्ध कमाई हो रही थी।
इसी तरह गुजरात में सहकारी डेयरी पर दूध सप्लाई करने वालों को देसी गाय से पशुपालक रोजाना 28.4 रुपये, क्रॉस बीड से 33.3 रुपये और भैंस से 25.2 रुपये प्रतिदिन का मुनाफा कमा रहे थे।

देश में रोजाना औसत दूध खरीद (लाख किलोग्राम)

राज्य अप्रैल-2019 अप्रैल-2020 अप्रैल-2021
हरियाणा   4.74   7.44   5.19
पंजाब  19.9   25.5   22.88
यूपी      19.9 25.5  22.88
एमपी   9.08   9.81   9.67
बिहार   19.83   19.52   14.77
ओडिशा   5.15   2.99   4.88
पश्चिम बंगाल  2.84   2.11   2.17
गुजरात   197.5   202.4   228.6
महाराष्ट्र   46.04   44.7   42.58
राजस्थान   27.34   27.99   29.9
आंध्र प्रदेश  17.41   17.33   19.94
कर्नाटक   70.22  69.37   77.32
केरल   12.58   10.69   14.61
तमिलनाडु  31.5   31.35   32.05
तेलंगाना   6.27   4.77   4.58
कुल   473.40   480.56   512.13

Source: Ministry of Animal Husbandry and Dairying

डेयरी मंत्रालय की एक रिपोर्ट, पशुपालकों को मिला अच्छा दाम
महाराष्ट्र के ज्यादातर किसानों का कहना है कि उन्हें दूध का 30 से 32 रुपये प्रति लीटर का भाव मिल रहा है। लेकिन डेयरी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख सहकारी समितियों ने जून 2021 में फुल क्रीम मिल्क को औसतन 52.57 रुपये प्रति लीटर की दर से लोगों को बेचा। जबकि 6 फीसदी फैट और 9 फीसदी एसएनएफ का दूध किसानों से 38.59 रुपये प्रति लीटर के रेट पर खरीदा। राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में सहकारी डेयरी पर दूध बेचने पर किसानों को राज्य सरकार की ओर से प्रति लीटर 2 से 5 रुपये तक की मदद भी दी जा रही है।