'लावारिस' हो गए सांसदों के गोद लिए गांव

'लावारिस' हो गए सांसदों के गोद लिए गांव

अरविंद मिश्र

भोपाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के कुछ महीनों के भीतर ही सांसद आदर्श ग्राम योजना का ऐलान किया था। योजना के तहत 2014 से 2019 के बीच चरणबद्ध तरीके से सांसदों को तीन गांव गोद लेने थे और 2019 से 2024 के बीच पांच गांव गोद लेने की बात कही गई है। लेकिन अपने क्षेत्र में विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले सांसदों ने इसमें कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई। इस कारण सांसदों के गोद लिए गांव भी विकास के लिए तरस रहे हैं। 

अगर यह कहा जाए की फंड के अभाव में सांसदों के गोद लिए गांव 'लावारिसÓ हो गए हैं तो इसमें अतिश्योक्ति नहीं होगी। ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा लोकसभा में 16 मार्च 2021 को दिए एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी सामने आई है कि पिछले 6 साल में देश भर में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 77,457 परियोजनाएं शुरू की गई थी जिनमें से 63.25 फीसदी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अगर मप्र्र की बात करें तो  यहां के 101 गांवों में संचालित 2,828 परियोजनाओं में से 1,894 यानी 66.9 प्रतिशत ही पूरी हो सकी हैं। ऐसे में गांवों में विकास आधे-अधूरे हैं।

1,753 गांवों में 77,457 परियोजनाएं

देश भर में चयनित ग्रामों में 77,457 परियोजनाएं शुरू की गई थी जिनमें से 11 मार्च 2021 तक जारी आंकड़ों के अनुसार 63.25 फीसदी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्यवार आंकड़ों को देखें तो पश्चिम बंगाल में 61 परियोजनाएं ही शुरू की गई थी। देश में सबसे सफल राज्य तमिलनाडु है जहां शुरू की गई 5,897 परियोजनाओं में से 91.5 फीसदी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। यूपी में 90.9, गुजरात में 77.3, कर्नाटक में 76.3, उत्तराखंड में 73.8, छत्तीसगढ़ में 71.1, मिजोरम में 70 फीसदी, मध्य प्रदेश में 66.9, हरियाणा में 66.8, सिक्किम में 62.7 और केरल में 62.4 फीसदी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। मेघालय में सिर्फ 25.7 फीसदी परियोजनाएं ही पूरी हुई हैं।

मध्यप्रदेश फीसड्डी 

मप्र में लोकसभा के 29 और राज्यसभा के 11 सांसद हैं। इनमें से लोकसभा के 28 और राज्यसभा के 8 सांसद भाजपा के हैं। यानी 40 में से 36 सांसद भाजपा के हैं, लेकिन इनमें से मात्र 7 सांसदों ने ही आदर्श ग्राम योजना के चौथे चरण में गांवों को गोद लिया है। इस कारण मप्र बड़े राज्यों में फीसड्डी साबित हुआ है। मप्र के सांसदों ने पांच चरणों में कुल 101 गांवों को गोद लिया है। 

इनमें सबसे कम चौथे चरण में अब तक मात्र 7 गांवों को गोद लिया है। जबकि चौथे चरण में उत्तर प्रदेश के 52, तमिलनाडु के 36, महाराष्ट्र के 32, गुजरात के 28, राजस्थान के 20, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के सांसदों ने 9-9 गांवों को गोद लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल सांसद आदर्श ग्राम योजना में मध्य प्रदेश के सांसदों की रुचि नहीं दिखाई दे रही है। 

अब तक 2046 गांवों को लिया गोद

11 मार्च 2021 तक के लिए जारी आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक 2,046 ग्राम पंचायतों को गोद लिया जा चुका है। देश भर में अब तक सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में 361 गांवों को गोद लिया गया है। इसके बाद तमिलनाडु में 203, महाराष्ट्र में 179, गुजरात में 129, राजस्थान में 120, आंध्र प्रदेश में 110, केरल में 104 और फिर मध्य प्रदेश का नंबर आता है जहां 101 गांवों को गोद लिया गया है।

गांव गोद लेने के कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए कलेक्टरों से इस दिशा में प्रगति की समीक्षा करने को कहा गया है। एसएजीवाई के तहत हर लोकसभा सदस्य को अपने क्षेत्र का एक गांव गोद लेना है। उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए उसके विकास पर ध्यान रखना है। 
-डॉ. आशीष सक्सेना, उप निदेशक, नीति, योजना एवं निगरानी, ग्रामीण विकास मंत्रालय

प्रदेश के गांवों के विकास के लिए हमारी सरकार लगातार तत्पर रही है। बेहतर नीति और सही नीयत से ही गांव, प्रदेश और देश का विकास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना ने गांव के विकास के द्वार खोल दिए हैं। इस योजना में 6 राज्यों के चुनिंदा जिलों को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया। इनमें हरदा, सीहोर और डिंडोरी सम्मिलित हैं। इस योजना द्वारा गांव के विकास के द्वार खुल गए हैं। आज गांव-गांव विकास की गंगा बहाई जा रही है। लोगों को अब किसी काम के लिए भटना नहीं पड़ता है।
-कमल पटेल, कृषि मंत्री

2024 तक 8 गांवों का विकास

केंद्र ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन के आंकलन के लिए एक साझा समीक्षा मिशन गठिन किया था। सांसद आदर्श ग्राम योजना का गांवों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है न ही इनके उद्देश्य की प्राप्ति हुई है। ऐसे में इस रिपोर्ट में योजना की समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। योजना में 2016 तक प्रत्येक सांसद को एक-एक गांव को गोद लेकर उसे विकसित करना था। 2019 तक दो और गांवों और 2024 तक आठ गांवों का विकास किया जाना था।