मप्र में नवाचारों के गांव नवादपुरा में अब आत्मनिर्भर गोशाला

मप्र में नवाचारों के गांव नवादपुरा में अब आत्मनिर्भर गोशाला

2020 (अगस्त) में काम शुरू हुआ 14 माह में तैयार 200 फीट की गौशाला

300 गाय रह सकेंगे इसलिए 17 एकड़ में लगाए पौधे

मोहिनी डी वर्मा

धार, धार जिले का छोटा-सा गांव नवादपुरा नवाचारों के लिए पहचान बना चुका है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, पक्की सड़कें व मकानों पर एक ही रंग और बच्चों के लिए तरणताल जैसी सुविधाओं के बाद अब यहां ऐसी पहली शासकीय गौशाला बनाई गई है, जो अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ आत्मनिर्भर होगी। हाल ही में गोशाला के शुभारंभ अवसर पर 11 गायों का प्रवेश भी करवाया गया। परिसर के 17 एकड़ में हरी घास व चरी के मध्य में अमरूद, नींबू, सहजन, खजूर, नारियल, सुपारी के पांच हजार पौधे लगाए गए हैं। दो-तीन साल बाद इनसे आय भी होने लगेगी। गौशाला की गायों के गोबर से दीपक, मूर्तियां, तोरण द्वार और गौ-मूत्र से सैनिटाइजर व अन्य उत्पादन बनाकर बाजार में बेचे जाएंगे। परिसर में ग्रामीण परिवेश नुमा चार काटेज बनाए गए हैं। प्राकृतिक वातावरण के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ये काटेज पर्यटकों के लिए आनलाइन बुकिंग के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे होने वाली आय भी गौशाला के संचालन में सहायक होगी। परिसर के मध्य में 10 बाय 200 फीट का मार्ग बना है, जिसके अंत में राधा-कृष्ण का मंदिर होगा। मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां रहने वाली गायों को देखते हुए आगे बढ़ेंगे।

सिखाएंगे पर्यावरण संरक्षण का पाठ

गांव के कमल पटेल बताते हैं कि गौशाला में गाय के गोबर व गौमूत्र से 10 तरह के जैविक खाद व दवा बनाई जाएगी। विक्रय करने के साथ यहां आने वाले किसान भाइयों को इसे बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। पर्यावरण के लिए नक्षत्र वाटिका भी बनाई गई है। इसमें विभिन्ना औषधीय पौधे लगाए गए हैं। परिसर में मियावाकी पद्धति से पौधे रोपे गए हैं।