पोषण हेतु फलदार पौधे लगाना आवश्यक: डॉ. अजय कुमार पांडेय

पोषण हेतु फलदार पौधे लगाना आवश्यक: डॉ. अजय कुमार पांडेय

रीवा। फलदार पौधे जैसे, आम, अनार, अमरूद, आंवला, पपीता, नींबू और कटहल जैसे पौधे गृह वाटिका में अवश्य रोपने चाहिये जो न केवल परिवार के सदस्यों को रंगबिरंगे, स्वादिष्ट और पौष्टिक फल उपलब्ध करवाते हैं बल्कि पर्यावरण सुधार हेतु भी लाभकारी होता है।  उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र -रीवा (म.प्र.) के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार पांडेय के हैं जिनके मार्गदर्शन में केन्द्र द्वारा 'फलदार एवं औषधीय पौध गृह वाटिका प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण में आयोजित किया गया।

इसे भी देखें

आज है विश्व बांस दिवस, जानिए क्यों मनाया जाता है यह दिन

संचालक विस्तार सेवायें, डॉ. दिनकर शर्मा के निर्देशन में तथा कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.एस.के.प्यासी के मार्गदर्शन में आयोजित पोषण सप्ताह एवं पोषण मास कार्यक्रम के अंतर्गत जी.डी.सी महाविद्यालय, रीवा में डॉ. चंद्रजीत सिंह ने आयुर्वेद एवं आहार विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। एक और कार्यक्रम में गोपेंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में तथा प्रियेश कनौडिया के मुख्य अतिथ्य में कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा द्वारा कृषक परिवारों हेतु औषधीय पौधों की गृह वाटिका का कृषक प्रक्षेत्र परीक्षण कार्यक्रम तथा फलदार पौधों की गृह वाटिका का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन और साथ में गृह वाटिका प्रंबधन विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

इसे भी देखें

जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढता है, वहां सफलता निश्चित है: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

इसी क्रम में एक अन्य प्रशिक्षण कायक्रम में डॉ. किंजल्क सी. सिंह ने समझाईश दी कि रसोई में यदि छोटी-छोटी सावधानियाँ जैसे सब्जी छीलने हेतु छिलनी का उपयोग, सब्जी पकाने के लिये लोहे की कड़ाही का उपयोग और चोकर सहित आटे का उपयोग, बरती जायें तो आहार के पोषण मान में वृद्धि की जा सकती है।       
डॉ. संजय सिंह, वैज्ञानिक विस्तार शिक्षा ने भोजन की थाली में अधिकाधिक प्राकृतिक रंग के भोज्य अवयवों को सम्मिलित करने की सलाह दी, जिससे न केवल आहार विविधतापूर्ण हो जायेगा बल्कि पौष्टिक भी अधिक हो जायेगा। 

मौसम वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बाहर के खाने में सावधानी बरतने की सलाह देते हुये यह भी बताया कि पोषण सप्ताह तथा पोषण मास का कार्यक्रम जनमानस में पोषण आहार के बारे में जागरुकता फैलाने के लिये आयोजित किया गया जिसमें सात दिन निरंतर इलैक्ट्रैनिक माध्यम से पोषण आहार सम्बंधी संदेश भी भेजे गये। तृतीय वर्ष की छात्रा सु श्री सोनिया दुबे ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये सभी का आभार माना। 

इसे भी देखें

भारत की धरती पर चीतों की वापसी से जुड़ी जैव विविधता की टूटी कड़ी: प्रधानमंत्री

उक्त कार्यक्रम में वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) डॉ. अखिलेश कुमार पटेल, वैज्ञानिक (उद्यानिकी) डॉ. राजेश सिंह, वैज्ञानिक (शस्य) डॉ. बृजेश तिवारी, पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार, वैज्ञानिक (शस्य) डॉ. स्मिता सिंह, वैज्ञानिक (पौध रोग) डॉ.केवल सिंह बघेल, वैज्ञानिक (कम्प्यूटर विज्ञान) मृत्युंजय कुमार मिश्रा तथा केंद्र के मौसम वैज्ञानिक सन्दीप शर्मा एवं मंजू शुक्ला तथा कार्यालय सहयोगी शत्रुघ्न वर्मा जी का सह्योग उल्लेखनीय रहा। 

- देश-दुनिया तथा खेत-खलिहान, गांव और किसान के ताजा समाचार पढने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म गूगल न्यूज, फेसबुक, फेसबुक 1, फेसबुक 2,  टेलीग्राम,  टेलीग्राम 1, लिंकडिन, लिंकडिन 1, लिंकडिन 2, टवीटर, टवीटर 1, इंस्टाग्राम, इंस्टाग्राम 1, कू ऐप से जुडें- और पाएं हर पल की अपडेट.