20 रुपए में गाय का पेट नहीं भरता है, गौशालाएं कुप्रबंधन की शिकार: स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी

20 रुपए में गाय का पेट नहीं भरता है, गौशालाएं कुप्रबंधन की शिकार: स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी

सीएम शिवराज को करना पड़ रहा दिग्विजय के पाप का प्रायश्चित

दिग्विजय सिंह ने गौ-सदन भंग कर बांट दी भूमि मेरे पास प्रमाण

भोपाल। भोपाल के बैरसिया में गायों की मौत ने गौशालाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी है। चारा-पानी और देखभाल के अभाव में प्रदेश की गौशालाओं में आए दिन गाय दम तोड़ रही हैं। इधर, मप्र पशु संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि 20 रुपए में गाय का पेट नहीं भरता है। कोरोना के चलते यह राशि भी पिछले दो साल में गौशालाओं को मिलने में देरी हुई है। 

उन्होंने कहा कि 2018 में कमलनाथ सरकार ने गौशालाओं के लिए 150 करोड़ का बजट तय किया था। जबकि 2021-22 में शिवराज सरकार ने 60 करोड़ का ही प्रावधान किया। यानी सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की, दोनों ने ही गौशालाओं की जरूरत के मुताबिक बजट नहीं दिया। प्रदेश में अभी 627 निजी और सीएम गौसेवा योजना से बनी 951 गौशालाओं में 2 लाख 55 हजार से अधिक गाय हैं। इनके साल भर खाने के लिए ही 184 करोड़ की जरूरत है, लेकिन सरकार की ओर से इतना बजट कभी दिया ही नहीं गया। उन्होंने यह भी कहा कि मप्र के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अपने शासनकाल में प्रदेश के विभिन्न जिलों के 10 गौ सदन भंग कर चरनोई भूमि कार्यकर्ताओं को बांट दी थी। मेरे पास दस्तावेजी प्रमाण हैं। मैं जल्दी ही इस मामले में कोर्ट में याचिका भी दायर करूंगा। मैं विधि विशेषज्ञों की सलाह ले रहा हूं कि 20 साल बाद भी मुकदमे दायर किए जा सकते हैं। मैं दिग्विजय को कोर्ट में दोषी सिद्ध कर दूंगा। जो पाप दिग्विजय ने किया है, उसका प्रायश्चित सीएम शिवराज सिंह को करना पड़ रहा है।
गौशाला संचालकों को चारे की राशि 15 दिन के अंदर उपलब्ध कराई जाए
उन्होंने कहा कि हमने बैरसिया में गायों की मौत की रिपोर्ट 15 दिन में विभाग से मांगी है। यह घटना कुप्रबंधन के कारण होना प्रतीत होती है। गौशाला संचालक की लापरवाही उजागर हुई है। एक दिन में गाय का कंकाल नहीं बनता है। लंबे समय से लापरवाही का परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में गाय मर गईं। हमने आदेश दिए हैं कि प्रदेश की गौशाला संचालकों को चारे की राशि हर हाल में 15 दिन के अंदर उपलब्ध कराई जाए।

व्यवस्था कुप्रबंधन की शिकार 
अखिलेश्वरानंद ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में गौशालाओं के निर्माण के लिए मनरेगा से 900 करोड़ का बजट दिया। इसी तरह 12,500 एकड़ यानी हर गौशाला के साथ 5-5 एकड़ जमीन भी उपलब्ध कराई ताकि गाय को चारा उपलब्ध हो सके, लेकिन यह व्यवस्था कुप्रबंधन की शिकार हो रही हैं। इस जमीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

तीन साल में 200 गौशालाएं बंद
सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण प्रदेश में 200 गौशालाएं बंद हो चुकी हैं। बीते एक साल में गौ-संवर्धन बोर्ड ने ही तीन गौशालाएं बंद कर दीं। इनमें एक भोपाल और दो देवास जिले की हैं। पशुपालन विभाग ने प्रदेश में संचालित 627 निजी गौशालाओं में से 25 का हाईटेक होने का दावा किया था। जिसके तहत गोबर से गौकाष्ठ बनाने की एक मशीन आई थी। लेकिन बिजली नहीं होने से एक महीने बाद ही कई मशीनें वापस चली गईं।

पांच साल में 5577 गायों की हत्या: जीतू पटवारी 
इधर, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने गायों की मौत के आंकड़े पेश करते हुए उन्हें हत्या करार दिया है। जीतू ने कहा कि प्रदेश में 5 साल में 5577 गायों की हत्या की गई। सरकारी आंकड़े इसके गवाह हैं। कांग्रेस गायों की मौत के पीछे का सच सामने लाकर सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगी। पटवारी ने आरोप लगाया कि गायों को बचाने के नाम पर लोगों की मॉब लिंचिंग की जा रही है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी गौशालाओं के रखरखाव और उनकी हत्या की समीक्षा कर जांच करेगी। गायों की मौत के पीछे की लापरवाही का विवरण देगी। कमेटी बताएगी कि कितनी गायों की हत्या हुई। साथ ही, गौशाला की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी।