मप्र में मिर्च की खेती बनी लाभ का धंधा

मप्र में मिर्च की खेती बनी लाभ का धंधा

भोपाल। खेती भी लाभ का धंधा है... इस वाक्य को मप्र के कई किसान सच साबित कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं धार के अनिल मुकाती। जिन्होंने मल्टी नेशनल कंपनी में 15 लाख के सालाना पैकेज की रीजनल मैनेजर की नौकरी छोड़कर सब्जी उगाने का बीड़ा उठाया। सब्जी उगाते-उगाते उन्होंने एक नया प्रयोग करते हुए मिर्च के पौधे उगाकर उसे बेचना शुरू किया। 5 साल में उनकी कमाई लाखों में पहुंच गई। आज अनिल अपनी 5 एकड़ पुस्तैनी जमीन पर करीब 1 करोड़ मिर्च के पौधे उगाकर देशभर में सेल कर रहे हैं।

खास बात यह है कि भी खुद मैनेजर रहे अनिल के लिए आज 3 मैनेजर समेत 38 लोगों की टीम काम कर रही है। अनिल ने इंदौर के कृषि कॉलेज से 2002 में ग्रेजुएशन करने के बाद एक साल का डिप्लोमा किया। इसके बाद एक कृषि कंपनी में रीजनल मैनेजर के पद पर काम करने लगे। फिलहाल वे अपने पिता मोहनलाल मुकाती, माता रुखमा मुकाती, पत्नी शीला मुकाती, बेटा भूमध्य मुकाती के साथ घर पर ही रहते हैं। 


राजस्थान के किसानों को देखकर जागी रुचि


अनिल ने बताया कि रीजनल मैनेजर रहते हुए राजस्थान और छत्तीसगढ़ का टूर लगता रहता था। जहां बड़े किसानों को मैं पॉलीहाउस से सब्जियों को तैयार करते हुए देखा करता था। मैंने किसानों से बात की तो पता चला कि वे लाखों रुपए महीने कमा रहे हैं। 2017 में खेती को लाभ का धंधा बनाने के अभियान के तहत उद्यानिकी विभाग ने 10 किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू की। इसमें मैं भी शामिल हो गया। अभियान के तहत मुझे पॉलीहाउस बनाने के लिए सरकार की ओर से मदद के रूप में लोन दिया गया। इससे मैंने एक एकड़ जमीन में बीज रहित खीरे लगाए। 4 महीने में ही खीरे के पौधे तैयार हो गए। इसी तरह 4 महीने में ही मुझे 9 लाख का फायदा हो गया। इतना बड़ा फायदा देख मेरी और मेरे परिवार की रुचि खेती में और बढ़ गई।


60 दिन में तैयार फसल


मेरे पॉलीहाउस से करीब 1 करोड़ मिर्च के पौधे लगे हुए हैं। इन पौधों को तैयार होने में करीब 45 दिन लगते हैं। इसके बाद अगले 15 दिनों में पौधे किसानों तक पहुंचाए जाते हैं। इसके बाद अगली सीजन की सब्जियों के लिए पौधे लगाने का काम शुरू कर दिया जाता है।


ले रहे 30 लाख का फायदा


किसान अनिल ने कुल 7 हेक्टेयर जमीन में से 5 एकड़ पर पॉलीहाउस बना रखा है, जहां किसानों की मांग पर मिर्च के पौधे तैयार किए जाते हैं। उनका कहना है कि वह हमेशा अच्छे बीजों का ही यूज करते हैं। इसके बाद ऑर्डर अनुसार आस-पास के जिलों के साथ दूसरे प्रदेश में भी पौधे सप्लाई करते हैं। एक पौधा तैयार करने में करीब 1 रुपए 40 पैसे का खर्च आता है, जिसे वह 1 रुपए 70 पैसे में बेचते हैं। उन्हें हर पौधे पर 30 पैसे की बचत होती है। इसी तरह हर 2 महीने में 1 करोड़ पौधे बेचने पर उन्हें 30 लाख रुपए का फायदा होता है।


इजराइली तकनीक का इस्तेमाल


पौधे तैयार करने में विशेष तौर पर तापमान का भी ध्यान रखना पड़ता है, जिसमें गर्मी के 4 महीनों से सितंबर तक पौधों की विशेष निगरानी करनी होती है। इसलिए तेज धूप से बचाने के लिए पॉलीहाउस की छत के नीचे ग्रीन नेट लगा रखी है, जिसे दिन में लगाते हैं, क्योंकि दिन का तापमान 42 के आसपास होता है। हालांकि पौधों के लिए 35 से 38 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। तापमान के लिए इजरायल में उपयोग होने वाले ऑटो मिशन फॉगर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसे 12 लाख रुपए में इंदौर से खरीदा था। मशीन ऑटो सिस्टम के तहत तापमान के अनुसार चालू-बंद होती रहती है।


बेंगलुरु से मंगाते है खाद 


अनिल ने बताया कि हमारे यहां पॉली हाउस की देखरेख के लिए 3 मैनेजर सहित 35 मजदूर काम करने आते हैं। उन्होंने बताया कि मिर्च के पौधे तैयार करने के बाद टमाटर और पपीते लगाए जाएंगे। पौधों के लिए बेंगलुरु से विशेष खाद मंगाई जाती है। पौधों की निगरानी के लिए पॉली हाउस में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं। 


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