कृषि वैज्ञानिकों ने बताया रबी फसलों में कैसे लें अच्छा उत्पादन

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया रबी फसलों में कैसे लें अच्छा उत्पादन

टीकमगढ़, कृषि विज्ञान केन्द्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. बी. एस. किरार, वैज्ञानिक डा. आर. के. प्रजापति, डा. एस. के. सिंह, डा. यू. एस. धाकड़, डा. एस. के. जाटव, डा. आई. डी. सिंह द्वारा रबी फसलो के विपुल उत्पादन हेतु वैज्ञानिको द्वारा किसानो को समसमायिकी सलाह-

गेंहू की फसल - गेंहू की फसल में द्वितीय  सिंचाई बुवाई के 40-45 दिन बाद कल्ले निकलते समय करें। ज समय से बोई गई फसल में तृतीय सिंचाई बुवाई के 60-65 दिन बाद तने में गांठे बनते समय करें, गेंहू मे यूरिया का उपयोग सिंचाई उपरान्त ही करे। जिससे कि नत्रजन का समुचित उपयोग हो सके ।यूरिया को छिड़काव (टाॅप ड्रेसिंग) सुबह या रात में न करें । क्योकि ओस की बूंदो के सम्पर्क में यूरिया आने से पौघे की पत्तियों को जला देती है। फसल से औस हटने पर  दिन के समय यूरिया का  दूसरा छिड़काव गमोट अवस्था में 20 से 30 कि.ग्रा. प्रति एकड़  किस्म के अनुसार करें ।

चना की फसल - चने के खेत में कीट नियंत्रण हेतु टी आकार खूटियां (14-15/एकड़) लगाये  और फली में दाना भरते समय खूंटियां निकाल लें । ज चने की फसल में चन की इल्ली का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (1-2 लार्वा/मी. पॅंक्ति) से अधिक होने पर इसके नियंत्रण हेतु कीटनाशी दवा फ्लूबेन्डामाइड 39.35: एस.सी. की 40 मिली/एकड़ या इन्डोक्साकार्ब 15.8: ई.सी. की 14 मिली./एकड़ का 150-200 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें ।

मटर की फसल - मटर की फसल की पत्तियों पर धब्बे दिखाई दे तो मेन्कोजेब 75: डब्ल्यू पी. फफॅंूदनाशी का 2 ग्रा. या कार्बेन्डाजिम 12ः $ मेन्कोजेब 63ः डब्ल्यू पी फफूंदनाशी के मिश्रण का 2 ग्रा/ली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें । ज मटर की फसल में चूर्णिल फफॅूदी (पाउडरी मिल्ड्यू)  रोग के लक्षण जैसे पत्तियों, फलियों एवं तनो पर सफेद चूर्ण दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिये फसल पर सल्फेक्स 3 ग्रा./ली.  पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें ।

मसूर की फसल - फसल पर एन.पी.के. (19ः19ः19) पानी में घुलनशील  उर्वरक को फूल आने से पहले और फली बनने की अवस्था पर 5 ग्रा./ली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए जिससे कि उपज में वृद्वि हो सके । ज फसल पर माहू कीट का प्रकोप दिखाई देने पर डायमिथोएट 30 ई.सी 2 मी.ली. /ली या इमिडाक्लोप्रिड 0.4 मि.ली./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें । 

गन्ना की फसल - शीतकालीन गन्ने की फसल में गुडाई करें । ज खेत में नमी की कमी होने पर सिंचाई कर सकते है । 

सरसों की फसल-  सरसों में सिंचाई, जल की उपलब्धना के आधार पर करें । यदि एक सिंचाई उपलब्ध हो तो 50-60 दिनों की अवस्था पर करें । दो सिचांई उपलब्ध होने की अवस्था में पहली सिंचाई  बुवाई के 40-50 दिनो के बाद एवं दूसरी 90-100 दिनो बाद करें । यदि तीन सिंचाई उपलब्ध है तो पहली 30-35  दिन पर व अन्य दो 30-35 दिनो के अंतराल पर करें । बुवाई के लगभग 2 माह बाद जब फलियों में दाने भरने लगे उस समय दूसरी सिंचाई करें । ज तापमान में तीव्र गिरावट के कारण पाले की भी आशंका रहती है । इससे फसल बढ़वार और फली विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । इससे बचने के लिये सल्फर युक्त रसायनों का प्रयोग लाभकारी होता है । डाई मिथाइल सल्फो आॅक्साइड का 0.2ः अथवा 0.1ः थायो यूरिया का छिड़काव लाभप्रद होता है। ज थायोयूरिया 200 ग्राम 200 लीटर पानी में घोल बनाकर फूल आने के समय एवं दूसरा छिड़काव फलियां बनने के समय प्रयोग करें । इससे फसल का पाले से भी बचाव होता है । ज फसल पर माहू कीट का प्रकोप दिखाई देने पर डायमिथोएट 30 ई.सी. 2 मि.ली./ली. या इडिाक्लोप्रिड 0.4 मिली/ली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें । 

सामान्य - सिंचाई हेतु स्प्रिंकलर, रैन-गन, ड्रिप इत्यादि का उपयोग करें  जिससे सिचाई के जल का समुचित उपयोग हो सके । ज रबी दलहन में हल्की सिंचाई (4-5 से.मी.) करनी चाहिए क्योंकि अधिक पानी देने से अनावश्यक वानस्पतिक वृद्वि होती है एवं दाने की उपज में कमी आ जाती है । ज रबी फसलो की पत्तियों पर धब्बे दिखाई दे तो मेन्कोजेब 2 ग्राम या कार्बेन्डाजिम$मेन्कोजेब (साफ) 2 ग्रा./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। ज जब भी पाला पड़ने की आशंका हो या मौसम विभाग द्वारा पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए अथवा खेत की मेडो पर अर्धरा़ित्र में धुआॅं करें । 

इसे भी देखें

- देश-दुनिया तथा खेत-खलिहान, गांव और किसान के ताजा समाचार पढने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म गूगल न्यूजगूगल न्यूज, फेसबुक, फेसबुक 1, फेसबुक 2,  टेलीग्राम,  टेलीग्राम 1, लिंकडिन, लिंकडिन 1, लिंकडिन 2, टवीटर, टवीटर 1, इंस्टाग्राम, इंस्टाग्राम 1कू ऐप से जुडें- और पाएं हर पल की अपडेट